समाज को शिक्षित करना ही पूज्य संत श्री दयारामजी का सपना(ध्यये) । समाज को शिक्षित करना ही पूज्य संत श्री दयारामजी का सपना(ध्यये) ।

समाज को शिक्षित करना ही पूज्य संत श्री दयारामजी का सपना(ध्यये) ।
जीवन के संकीर्ण दायरे से बाहर निकलकर जन जन के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहने वाले इस संसार में बिरले ही होते हैं। ऐसे ही एक संत है जोधपुर जिले के शिकारपुरा स्थित श्री राजारामजी आश्रम के वर्तमान गादीपति श्री दयारामजी महाराज।
आम जन के विकास के लिए समर्पित महाराजश्री का कहना है कि "मानव जीवन मिला है,उसे व्यर्थ गंवाने की बजाय लोगों को सच्चे मार्ग पर लाकर उनका जीवन सुधारने का प्रयत्न करना चाहिए"।
जोधपुर जिले की लूणी तहसिल के शिकारपुरा स्थित श्री राजारामजी आश्रम के वर्तमान गादीपति श्री दयारामजी महाराज जन जन को शिक्षा का संदेश दे रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा के बिना जीवन ही अधूरा है।
"शिक्षा नौकरी के लिए नही,बल्कि जीवन को सुखमय एवं शान्तिमय तरीके से जीने के लिए जरुरी है।"
महाराजश्री आश्रम में आने वाले प्रत्यके व्यक्ति को भ्रूण हत्या रोकने ,शिक्षा और व्यसन से मुक्ति का संदेश देते है। इसके अलावा भजन कीर्तन व प्रवचन में जहाँ भी जाते है वहाँ 'परम पूज्यनीय संत श्री राजेश्वर भगवान के उपदेशों को जन जन तक पहुंचाने के साथ जाति-पाति,धर्म रंग के भेदों को दूर करने,बाल विवाह नही करने,मुत्यु भोज का आयोजन नही करने और सामाजिक बुराइयों को दूर करने व कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संदेश देते है।
मानव सेवा के संकल्प को अंगीकार करते हुए संत श्री ने ग्रामीण अंचल के लोगों के सर्वांगीण विकास एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक उन्नयन के लिए कई छात्रावास बनवाएं और कई स्कूल खुलवाएं।
वर्तमान में वहाँ पर हजारों बालक-बालिकायें अपने भविष्य का सपना बुन रहे है। आपकी गुरू भक्ति,निस्वार्थ भक्ति भावना व सरल व्यक्तित्व का ही नतीजा है कि आपको इतनी कम उम्र में ही गादीपति के पद पर सुशोभित किया।अपने मधुर व्यवहार और सेवा की भावना से न केवल जोधपुर जिले में,बल्कि देश भर में अपनी अलग छाप छोड़ी है।
यह सकारात्मक सोच का ही नतीजा है कि आपने मानवीय मूल्यों को समझ कर छात्रावासों,विद्यालयों व धर्मशालाओं का निर्माण करवाया। आपके साधारण व्यक्तित्व और महानता का ही परिचायक है कि प्रतिवर्ष चिकित्सा शिविर आयोजित करवाते हैं जिसमें हजारों लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा का लाभ मिलता है। शिविर में चिकित्सा सुविधा व दवाइयां भी मुफ्त में दी जाती हैं।
महाराजश्री के दर्शन करने और चरण स्पर्श करने मात्र से ही लोगों को भगवान को साक्षात् रुप की अनुभूति होती है।
****आइये जाने 'परम पूज्यनीय संत श्री राजेश्वर भगवान के आश्रम के बारे में***
-आश्रम का परिचय
जोधपुर हाइवे रोड संख्या 65 कांकाणी से लूणी रोड पर शिकारपुरा में आश्रम आया हुआ है। यह आश्रम जोधपुर रेलवे स्टेशन से ३० किलोमीटर,जोधपुर शहर के हवाई अड्डे से ३५ किमी.,बस स्टैंड से ३१किमी. तथा लूणी जंक्शन रेलवे स्टेशन से ६ किलोमीटर दूरी पर आया हुआ है।
श्री दयारामजी महाराज ने गुरुगादी संभालने के बाद आश्रम में कई निर्माण कार्य कराएं है। आश्रम के चारों और हरियाली देखते ही भक्तों को सुखद जीवन की अनुभूति होती है। आश्रम में विशाल भोजनशाला बनी हुई हैं,यहाँ आने वाले प्रत्येक श्रध्दालु को भोजन-नाश्ता करवाया जाता हैं। आश्रम में ही श्री राजारामजी गौशाला है जिसमें वर्तमान में करीब 557 छोटे बड़े गौ वंश पल रहे हैं।
-आश्रम के चौथे गादीपति हैं संत श्री दयारामजी महाराज
वर्तमान में जहाँ विशाल आश्रम बना हुआ हैं वहाँ सबसे पहले श्री राजेश्वर भगवान ने अपने रहने के लिए एक बगीची बनाई थी जिसको वर्तमान मे श्री राजारामजी आश्रम के नाम से पुकारा जाता है।
श्री राजेश्वर भगवान ने श्रावण वद् १४ संवत २००० को जीवित समाधि ली। गुरुवर की समाधि के बाद उनके प्रधान शिष्य श्री देवारामजी महाराज को विधिविधान से गादी पर बैठाया तथा महंतश्री की उपाधि से विभूषित किया।
प्रधान शिष्य श्री देवारामजी महाराज ने भी अपने जीवन में "श्री राजेश्वर भगवान" के उपदेशों को जन जन तक।
प्रधान शिष्य श्री देवारामजी महाराज के ब्रह्मलीन होने के श्री किशनाराम महाराज को गादीपति बनाया गया। उन्होंने समाज को एक धागे में पिरोकर पूरे देश में शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया। वे ६ जनवरी २००७ को पंचतत्व(देवलोकगमन) में विलीन हो गए।
श्री किशनाराम महाराज के बाद चौथे गादीपति के रुप में २२ जनवरी २००७ को श्री दयारामजी महाराज को महंतश्री की उपाधि दी और गादीपति बनाया गया। आपके अथक प्रयासों से वर्तमान समय में कई जिलों में हॅास्टल,स्कूल्स संचालित हो रही है। देश के विभिन्न राज्यों में धर्मशालाएं बनवाई। इसके अलावा प्रयासों से कई गरीब छात्रों को पढ़ाई के लिए छात्रवृति भी दी जा रही है।
-आयोजित होते हैं शिविर आश्रम में
आश्रम के गादीपति श्री दयारामजी महाराज की प्रेरणा से आपके सानिध्य में प्रतिवर्ष चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
महाराजश्री के अथक् प्रयासों से पश्चिम राजस्थान में आज से कुछ सालों पहले जो विकास का पौधा बोया था,आज वह वटवृक्ष बनकर तैयार हैं।
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धन्यवाद!
(स्रोत: रमेश एस. आँजणा)