गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ।।

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ख़रीफ़ की फ़सल - मक्का

मक्का की खेती खरीफ एवं जायद दोनों फसलो में की जा सकती है, मक्का की खेती चारा तथा दाना, दोनों के लिए की जाती है, साथ ही यह अल्प अवधि की फसल होने के कारण बहुफसली खेती के लिए इसका अत्यंत महत्व है

जलवायु और भूमि..

मक्का की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आश्यकता होती है ?
मक्का की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु के साथ-साथ बुवाई के समय 18 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना आवश्यक है, इसकी अच्छी उपज हेतु दोमट या बलुई दोमट भूमि उपयुक्त होती है

प्रजातियाँ..

रबी की फसल - जौ

जौ की खेती सिंचाई एवं उर्वरक के सीमित साधन एवं असिंचित दशा में गेहूं की अपेक्षा अधिक लाभप्रद है, असिंचित उसरीली तथा बिलम्ब से बुवाई के स्थानों पर जौ की खेती अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हुई है, जौ की खपत भारत में मौजूदा स्थित या समय में बहुत कम है, लेकिन इसकी पैदावार औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है, खास कर जिन लोगों को डायबिटीज होती है, उनके लिए ये खाने के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुई है

प्रजातियाँ..

जौ की खेती के लिए कौन सी उन्नतशील प्रजातियाँ हैं, जिन्हें आपको बोना है?

जौ की उन्नतशील प्रजातियाँ तीन प्रकार की पाई जाती हैं,एक तो-

रबी की फसल - गेंहू

भारत में गेहूँ एक मुख्य फसल है, गेहूँ का लगभग 97% क्षेत्र सिंचित है, गेहूँ का प्रयोग मनुष्य अपने जीवन यापन हेतु मुख्यत रोटी के रूप में प्रयोग करते हैं, जिसमे प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पायी जाती हैI भारत में पंजाब,हरियाणा , राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश मुख्य फसल उत्पादक क्षेत्र हैं

प्रजातियाँ..

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